डॉ. प्रीति अदाणी ने वाराणसी में आधुनिक चुनौतियों के समाधान में प्राचीन ज्ञान की प्रासंगिकता पर दिया जोर

वैश्विक अर्थव्यवस्था के बदलते शक्ति संतुलन में भारत की भूमिका अहम

वाराणसी, 2 नवंबर 2026: अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित "आधुनिक चुनौतियों के समाधान में प्राचीन ज्ञान" विषय पर विश्व संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में मुख्य संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि प्राचीन ज्ञान को आज की समस्याओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि उसका उपयोग लोगों के जीवन को बेहतर बनाने में किया जा सके।

उन्होंने कहा, "प्राचीन ज्ञान केवल इसलिए मूल्यवान नहीं हो जाता क्योंकि वह पुराना है। उसका वास्तविक महत्व तब है, जब हम आज की समस्याओं के समाधान में उसकी उपयोगिता को समझते हैं।" उन्होंने मानवीय पीड़ा, असमानता और संघर्ष जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की प्राचीन सभ्यता से मिले ज्ञान को संरक्षित करने और उसे व्यवहार में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा, "ज्ञान हमें दुनिया बदलने की शक्ति देता है, जबकि विवेक यह सुनिश्चित करता है कि हम दुनिया को बेहतर बनाने के लिए बदलें।"

डॉ. अदाणी ने यूनानी दार्शनिक अरस्तू के मानव कल्याण से जुड़े विचारों, भगवान बुद्ध की उन शिक्षाओं का उल्लेख किया, जो मानव जीवन के दुखों को दूर करने पर केंद्रित थीं। इसके साथ ही उन्होंने प्राचीन चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों का भी जिक्र किया, जिनकी शिक्षाएं नैतिक आचरण, जिम्मेदारी और सामाजिक सद्भाव पर जोर देती हैं। उन्होंने इन सभी विचारधाराओं को भारत की प्राचीन अवधारणा वसुधैव कुटुंबकम यानी पूरी दुनिया एक परिवार है, से जोड़ते हुए कहा कि सभ्यतागत ज्ञान का उपयोग लोगों का जीवन बेहतर बनाने और सतत विकास को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

समुदायों के विकास के क्षेत्र में तीन दशकों के अपने अनुभव साझा करते हुए डॉ. अदाणी ने कहा कि किसी भी प्रगति का आकलन इस आधार पर होना चाहिए कि उससे लोगों के जीवन में कितना बदलाव आया है। उन्होंने सेवा यानी निस्वार्थ भाव से समाज की मदद करने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसका अर्थ है लोगों की जरूरतों और समस्याओं को समझना, उनकी बात सुनना और उन्हें अपना भविष्य बेहतर बनाने के लिए सक्षम बनाना। वर्ष 1996 में स्थापित अदाणी फाउंडेशन, अदाणी समूह की सामाजिक विकास से जुड़ी संस्था है। यह देश के 22 राज्यों के 7,000 गांवों में काम कर रही है और अब तक 1.3 करोड़ लोगों के जीवन को प्रभावित कर चुकी है।

उन्होंने भारत नॉलेज ग्राफ का भी उल्लेख किया, जिसके लिए अदाणी समूह ने 1 करोड़ अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। यह पहल भारत की प्राचीन सभ्यता और ज्ञान परंपरा से जुड़ी जानकारी को विभिन्न विषयों में शोध करने वाले विद्वानों के लिए सुलभ बनाती है। साथ ही, इसके माध्यम से 14 रिसर्चर्स को डॉक्टरेट की पढ़ाई में सहयोग दिया जा रहा है।

अपने संबोधन द रिटर्न ऑफ़ अ मल्टीपोलर वर्ल्ड में संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशंस नेटवर्क के अध्यक्ष और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के निदेशक प्रोफेसर जैफ़्रे डी सैच्स ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बदलते शक्ति संतुलन और इसमें भारत की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वैश्विक उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2000 में 5.2% थी, जो 2026 में बढ़कर 8.5% हो गई है। अनुमान है कि यह हिस्सेदारी वर्ष 2050 तक 13.1% और 2100 तक 15.1% हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक शक्ति का केंद्र एशिया और अफ्रीका की ओर बढ़ेगा। वहीं, अनुमान के अनुसार वर्ष 2100 तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 13.7% रह सकती है।

प्रोफेसर सैच्स ने भारत और दुनिया भर में सतत विकास के क्षेत्र में अदाणी समूह और अदाणी फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे व्यापक कार्यों की सराहना की। इसके बाद हुई बातचीत में उन्होंने अदाणी समूह को भारत में बदलाव और विकास को गति देने वाले प्रमुख समूहों में से एक बताया। उन्होंने देश में इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और आर्थिक विकास में अदाणी ग्रुप की महत्वपूर्ण भूमिका का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कारोबार में परिवार के नाम से जुड़ी जिम्मेदारियों पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने परिवार द्वारा संचालित कारोबार और मुख्य रूप से शेयरधारकों को मुनाफा देने के उद्देश्य से चलने वाली कंपनियों के बीच अंतर बताते हुए कहा कि परिवार के नाम से चलने वाले व्यवसाय के साथ उसकी विरासत भी जुड़ी होती है। ऐसे व्यवसायों की जिम्मेदारी होती है कि वे समाज के प्रति अपने योगदान के बारे में भी सोचें। उनके इन विचारों ने भारत के आर्थिक विकास से जुड़ी चर्चा को कारोबार की सामाजिक जिम्मेदारी और समाज के प्रति योगदान के व्यापक मुद्दे से भी जोड़ा।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने भारत की सभ्यता की अटूट शक्ति और उसकी ज्ञान परंपरा को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में तकनीक से मिलने वाले अवसरों पर अपने विचार रखे। विवेक अग्रवाल ने कहा, "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्राचीन ग्रंथों को समझने, उनमें छिपे ज्ञान और विचारों को बेहतर ढंग से जानने तथा भारत की सभ्यतागत ज्ञान परंपरा को आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुलभ और प्रासंगिक बनाने में मदद कर सकता है।"

इससे पहले, उद्घाटन सत्र की शुरुआत कोलंबिया विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ. निरुपम बाजपेयी के संबोधन से हुई। उन्होंने संगोष्ठी के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की शुभकामनाएँ दीं और विचारों तथा आध्यात्मिक परंपराओं के मिलन स्थल के रूप में वाराणसी की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डाला।

वाराणसी में आयोजित यह संगोष्ठी एक अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत ग्रीस से हुई थी। इसके तहत वर्ष 2022 में एथेंस और 2023 में स्टागिरा में बैठकें आयोजित की गईं। इसके बाद वर्ष 2024 में चीन के कुफू और बीजिंग में भी इस श्रृंखला के अंतर्गत आयोजन हुए।

अदाणी ग्रुप के बारे में जानकारी

भारत के अहमदाबाद में मुख्यालय वाला अदाणी ग्रुप देश के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में से एक है। समूह की रुचि संसाधन, लॉजिस्टिक्स, ऊर्जा, कृषि, रियल एस्टेट, पब्लिक ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कंज्यूमर फाइनेंस और रक्षा जैसे क्षेत्रों में है। 'राष्ट्र निर्माण' और 'सबके कल्याण के साथ विकास' के मूल सिद्धांतों से प्रेरित यह समूह सतत विकास और क्षेत्रीय बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।

मीडिया संपर्क: roy.paul@adani.com

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