अहमदाबाद, 14 मार्च 2026: आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हल्दिया बल्क टर्मिनल (एचबीटी) का शुभारंभ किया और इसे औपचारिक रूप से देश को समर्पित किया। यह टर्मिनल हर साल लगभग 4 एमएमटीपीए ड्राई बल्क कार्गो संभालने की क्षमता के साथ बनाया गया है। हुगली नदी के किनारे स्थित यह एक पूरी तरह स्वचालित बल्क टर्मिनल है, जिसमें सीधे रेल कनेक्शन की सुविधा भी दी गई है। यह परियोजना भारत के पूर्वी समुद्री कॉरिडोर में बल्क कार्गो के आवागमन को अधिक तेज, व्यवस्थित और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण ढांचागत सुधार मानी जा रही है।
एपीएसईजेड के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ, अश्वनी गुप्ता ने कहा, "हल्दिया बल्क टर्मिनल एक नई पीढ़ी की आधुनिक सुविधा है, जो हुगली नदी क्षेत्र में पूरी तरह मशीनीकृत प्रणाली और सीधे रेल के जरिए कार्गो निकासी की व्यवस्था लेकर आई है। इससे भारत के पूर्वी समुद्री तट पर कार्यकुशलता का एक नया मानक स्थापित होगा। उन्नत स्वचालित तकनीक की मदद से जेटी पर डंपिंग की जरूरत खत्म होगी और कार्गो के नुकसान को भी कम किया जा सकेगा। इससे संचालन पहले की तुलना में ज्यादा स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ बनेगा। यह टर्मिनल वेस्ट बंगाल, ओडिशा और झारखंड के औद्योगिक सप्लाई चेन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विज़न को भी आगे बढ़ाएगा, जिसमें आधुनिक मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए लॉजिस्टिक्स लागत कम करने पर जोर दिया गया।
यह टर्मिनल हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (एचडीसी) में स्थित है, जो श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट, कोलकाता का हिस्सा है। इसे 30 साल की रियायत के तहत डिज़ाइन, बिल्ड, फाइनेंस, ऑपरेट और ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर एचडीसी बल्क टर्मिनल लिमिटेड द्वारा विकसित किया गया है। इस परियोजना का निर्माण कार्य 14 जुलाई 2023 को शुरू हुआ था और आज यह तय समयसीमा के भीतर पूरी तरह तैयार होकर संचालन के लिए तैयार है। यह उपलब्धि एपीएसईजेड की उस क्षमता को दर्शाती है, जिसके तहत वह बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर और कुशल तरीके से पूरा करने में सक्षम है।
हल्दिया बल्क टर्मिनल को हुगली नदी के पश्चिमी तट पर रणनीतिक रूप से स्थापित किया गया है। यह टर्मिनल आयातित कोयला और कई तरह के ड्राई बल्क सामान को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत के पूर्वी समुद्री तट के माध्यम से देश के लगभग 60% ड्राई बल्क आयात होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से कोयला, बॉक्साइट और चूना पत्थर शामिल हैं। इसी कारण हल्दिया पोर्ट स्टील, एल्युमिनियम और पावर उद्योगों के लिए सबसे तेज और प्रभावी समुद्री प्रवेश द्वार माना जाता है, खासकर वेस्ट बंगाल, ओडिशा और झारखंड के उद्योगों के लिए। इस नई क्षमता के जुड़ने से इन उद्योगों के लिए लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और माल के आने-जाने में लगने वाला समय भी काफी घटेगा।
निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से एपीएसईजेड ने इस परियोजना के तहत कई महत्वपूर्ण इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्य पूरे किए हैं:
- 2,000 टन क्षमता का रेलवे वैगन लोडिंग सिस्टम (आरडब्ल्यूएलएस) स्थापित किया गया और 1.54 किमी लंबी समर्पित रेलवे लाइन चालू की गई, जिससे जहाज से सीधे ट्रेन में कार्गो भेजने की सुविधा मिलती है।
- मौजूदा जेट्टी का नवीनीकरण किया गया।
- आधुनिक कन्वेयर सिस्टम लगाए गए, जिससे माल की आवाजाही की प्रक्रिया स्वचालित हो गई है।
- स्टॉकयार्ड को स्वचालित तरीके से संभालने के लिए दो स्टैकर-कम-रिक्लेमर मशीनें लगाई गईं।
- जहाजों से माल उतारने की प्रक्रिया तेज करने के लिए दो मोबाइल हार्बर क्रेन भी जोड़ी गईं।
इस टर्मिनल की सबसे महत्वपूर्ण सुविधाएँ आरडब्ल्यूएलएस और समर्पित रेलवे लाइन हैं। इन दोनों की मदद से जहाजों से उतारा गया बल्क कार्गो सीधे रेलवे वैगनों में लोड किया जा सकता है और तुरंत मुख्य रेल मार्गों से जुड़ जाता है। इससे पोर्ट पर माल के रुकने का समय कम होता है और तीन राज्यों के उद्योगों तक पहुंचने वाले कच्चे माल की कुल लागत भी घटती है।
हल्दिया बल्क टर्मिनल भारत सरकार के सागरमाला प्रोग्राम और पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान की सोच को सीधे तौर पर दर्शाता है। इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य आधुनिक मल्टीमॉडल पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करके भारत की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस सुविधा को देश को समर्पित करना इस बात को दिखाता है कि भारत के पूर्वी समुद्री तट के आधुनिकीकरण को राष्ट्रीय स्तर पर कितना रणनीतिक महत्व दिया जा रहा है।
Key Specifications
| Specification |
Detail |
| स्थापित क्षमता |
4 MMTPA |
| कार्गो का प्रकार |
ड्राई बल्क (कोयला और अन्य थोक वस्तुएँ) |
| ड्राफ्ट |
8.5 मीटर |
| बर्थ |
1 (बर्थ की लंबाई: 193 m; चरम मूरिंग बिंदु: 337 m) |
| मोबाइल हार्बर क्रेन |
2 |
| स्टैकर-कम-रिक्लेमर |
2 |
| रेलवे वैगन लोडिंग प्रणाली |
1 यूनिट (2,000 टन क्षमता) |
| समर्पित रेल लाइन |
1.54 किलोमीटर |
| कन्वेयर प्रणाली |
2.10 किलोमीटर |
| रियायत अवधि |
30 वर्ष |