कार्यक्रम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए गुजरात सरकार की राज्य शिक्षा मंत्री रिवाबा रविंद्रसिंह जडेजा
ने कहा, “आज शोध केवल विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है। इसकी शुरुआत अदाणी इंटरनेशनल स्कूल
जैसे संस्थानों से होती है। जब बच्चे कम उम्र में सवाल पूछना, प्रयोग करना और असफलता से सीखना शुरू करते
हैं, तभी वैज्ञानिक सोच विकसित होती है। स्कूलों को केवल शिक्षा केंद्र नहीं, बल्कि विचारों और समाधानों के
इनक्यूबेटर बनना होगा।” इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए अदाणी ग्रुप की प्रमोटर और अदाणी इंटरनेशनल स्कूल -
डायरेक्टर (नॉन-एग्जीक्यूटिव) नम्रता अदाणी ने कहा, “अदाणी इंटरनेशनल स्कूल में हमारा मानना है कि जिज्ञासा
को बचपन से पोषित करना चाहिए और सीखने की सीमा किताबों से आगे होनी चाहिए। IRIS नेशनल फेयर जैसे मंच
विद्यार्थियों को प्रयोग करने, प्रश्न उठाने और वास्तविक चुनौतियों पर ज्ञान लागू करने का अवसर देते हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत प्रिंसिपल्स एवं एजुकेटर्स कॉन्फ्रेंस से हुई, जिसमें अहमदाबाद के कई स्कूल के एजुकेशनल
लीडरशिप ने भाग लिया और स्टेम शिक्षा में इनक्वायरी-बेस्ड तथा अनुभवात्मक शिक्षण को मजबूत करने पर
विचार-विमर्श किया।