अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस ने मजबूत किया भारत का ग्रीन एनर्जी फ्रेमवर्क, 6,000 मेगावाट का इंटीग्रेटेड ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर

अहमदाबाद, 9 फरवरी, 2026:भारत की सबसे बड़ी निजी ऊर्जा सेवा कंपनी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने अपने प्रमुख हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (एचवीडीसी) ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए जापान के बैंकों के एक संघ से दीर्घकालिक फंडिंग सुनिश्चित की है। यह ग्रीन एवैकुएशन कॉरिडोर उत्तर भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के प्रवाह को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। यह प्रोजेक्ट राजस्थान के सोलर एनर्जी बहुल क्षेत्रों से पैदा रिन्यूएबल एनर्जी को देश की राष्ट्रीय ग्रिड तक पहुँचाने में अहम् भूमिका निभाएगा, जिससे उत्तर भारत में बढ़ती क्लीन एनर्जी की माँग को मजबूती मिलेगी। ±800 केवी क्षमता वाले उच्च क्षमता एचवीडीसी नेटवर्क के रूप में तैयार यह 950 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, 6,000 मेगावाट बिजली के ट्रांसमिशन की क्षमता के साथ राजस्थान के भादला को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से जोड़ेगा। वर्ष 2029 तक इसके चालू होने की योजना है। यह लिंक बड़े पैमाने पर रिन्यूएबल एनर्जी को ग्रिड से जोड़ने में अहम् भूमिका निभाएगा और देश के प्रमुख शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करेगा।

यह एसेट अदाणी ग्रुप के इंटीग्रेटेड क्लीन एनर्जी प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। राजस्थान, अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के लिए एक प्रमुख बिजली उत्पादन केंद्र बना हुआ है, जहां के प्रोजेक्ट पहले से ही एईएसएल की सहयोगी कंपनी अदाणी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड (एईएमएल) को क्लीन एनर्जी की आपूर्ति कर रही हैं। एईएमएल फिलहाल अपनी कुल बिजली आपूर्ति में 40% से अधिक रिन्यूएबल एनर्जी को शामिल कर रहा है, जिससे मुंबई दुनिया के उन बड़े शहरों में शामिल हो गया है, जहाँ सतत ऊर्जा की हिस्सेदारी काफी मजबूत है।

जापान के बैंकिंग पार्टनर्स एमयूएफजी बैंक लिमिटेड और सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन (एसएमबीसी) के नेतृत्व में हुआ यह सहयोग भारत के रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर पर अंतर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। इस परियोजना को हिताची की एडवांस एचवीडीसी तकनीक का समर्थन मिला है, जिसे भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है, और साथ ही इसमें देश की घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का पूरा उपयोग किया गया है। उक्त साझेदारियाँ मिलकर जहाँ एक ओर जापान की ट्रांसमिशन तकनीक में नेतृत्व को प्रदर्शित करती हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी उजागर करती हैं कि ये 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत की स्थानीय निर्माण क्षमता को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।

भारत-जापान के बीच मजबूत होता वित्तीय और औद्योगिक सहयोग, एईएसएल को जापानी रेटिंग एजेंसी जेसीआर द्वारा दी गई बीबीबी+ (स्थिर) क्रेडिट रेटिंग में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। यह रेटिंग भारत की संप्रभु रेटिंग के अनुरूप है, जो एक साथ देश की नीतिगत व्यवस्था और एईएसएल की वित्तीय मजबूती पर अंतर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाती है।

एईएसएल के सीईओ कंदर्प पटेल ने कहा, " यह परियोजना भारत के ग्रीन ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जापान के हमारे साझेदारों, यानि प्रमुख बैंकों और हिताची का लगातार समर्थन भारत-जापान साझेदारी की गहनता और सतत ऊर्जा भविष्य के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता को बखूबी दर्शाता है। एईएसएल भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर लगातार ध्यान दे रहा है, ताकि भारत के ऊर्जा परिवर्तन में गति लाई जा सके।" यह फंडिंग एईएसएल के सतत डेट फ्रेमवर्क के तहत जुटाई गई है, जो इक्वेटर सिद्धांतों के अनुरूप है। इसके तहत भाग लेने वाले ऋणदाता इस सुविधा को ग्रीन लोन के रूप में वर्गीकृत कर सकते हैं और यह जिम्मेदार विकास व वैश्विक ईएसजी मानकों के प्रति एईएसएल की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है। इस लेनदेन में लाथम एंड वाटकिंस और सराफ एंड पार्टनर्स ने ऋण प्राप्तकर्ता के कानूनी सलाहकार की भूमिका निभाई, जबकि लिंकलैटर्स और सिरिल अमरचंद मंगलदास ने ऋणदाताओं को सलाह दी।

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