उन्होंने कहा कि ग्रुप की इस सोच में कामगारों को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अदाणी ग्रुप का लक्ष्य सिर्फ प्रोजेक्ट पूरे करना नहीं, बल्कि रोजगार के अवसर बढ़ाना और समुदायों को मजबूत बनाना है। कंपनी के अनुसार, कर्मचारी, ठेकेदार और पार्टनर-सभी मिलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं।
गौतम अदाणी ने कहा, “जब हम कोई प्रोजेक्ट पूरा करते हैं, तो हम सिर्फ काम नहीं करते, बल्कि देश का भविष्य बनाते हैं।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अब सभी प्रोजेक्ट साइट्स पर लोकल लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। पहले आसपास के इलाकों के लोगों को मौका मिलेगा, उसके बाद राज्य के अन्य हिस्सों और जरूरत पड़ने पर अन्य जगहों से लोगों को जोड़ा जाएगा।
कामगारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए बड़े स्तर पर पहल की जा रही है। मुंद्रा और खावड़ा में लगभग 50,000 कामगारों के लिए वातानुकूलित सुविधा के साथ रहने की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा मुंद्रा में एक क्लाउड किचन तैयार किया जा रहा है, जहां रोजाना करीब 1 लाख लोगों के लिए पौष्टिक खाना उपलब्ध कराया जाएगा।
गौतम अदाणी ने कहा, ““यह कोई विशेष सुविधा नहीं है, बल्कि एक जरूरत है। हर कामगार को सम्मान के साथ जीने और काम करने का अधिकार है।”
ग्रुप अपने काम करने के तरीके में भी बदलाव ला रहा है। फैसलों को तेज़ बनाने के लिए 3 लेयर सिस्टम लागू किया जा रहा है। इससे साइट पर होने वाले निर्णय पहले की तुलना में काफी तेजी से लिए जा सकें।
साथ ही, कंपनी ठेकेदारों और पार्टनर्स के साथ लंबे समय तक काम करने के मॉडल पर फोकस कर रही है, ताकि काम में तेजी और गुणवत्ता दोनों बढ़ाई जा सके। इस मॉडल के जरिए छोटे स्तर से शुरुआत करने वाले उद्यमियों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। इसके साथ-साथ इन पार्टनर्स को फाइनेंस की सुविधा, तय रिटर्न और लंबे समय तक साथ काम करने के मौके भी दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरीके से जमीनी स्तर पर कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने गुजरात के कच्छ के हदू वेरसी रबारी का जिक्र किया, जिन्होंने एक पानी के टैंकर से काम शुरू किया था और आज कई तरह की मशीनों के साथ बड़े प्रोजेक्ट्स में काम करने वाला कारोबार खड़ा कर लिया है।