पीवीसी

भारत तेजी से दुनिया के प्रमुख पेट्रोकेमिकल केंद्रों में अपनी जगह बना रहा है। मजबूत अर्थव्यवस्था, बढ़ती घरेलू मांग और लगातार हो रहा इन्वेस्टमेंट इस क्षेत्र की वृद्धि को गति दे रहे हैं। आज भारत रसायन और पेट्रोकेमिकल बिक्री के मामले में दुनिया में छठे स्थान पर है और वैश्विक बाजार में उसकी हिस्सेदारी लगभग 3% है। वर्तमान में यह उद्योग 220 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसके 300 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। दीर्घकालिक लक्ष्य 2040 तक इसे 1 ट्रिलियन डॉलर के उद्योग के रूप में विकसित करना है।


इस विकास की एक बड़ी वजह पीवीसी (PVC) की घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर है। बुनियादी ढांचे, कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े कार्यों में पीवीसी की मांग तेजी से बढ़ी है, जबकि देश में इसका उत्पादन अपेक्षित गति से नहीं बढ़ पाया है। यही कारण है कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा पीवीसी रेजिन आयातक है। वित्त वर्ष 2026 में देश की कुल पीवीसी खपत का लगभग 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा होने की उम्मीद है।


इस कमी को दूर करने के लिए कंपनी गुजरात के मुंद्रा में विश्वस्तरीय पेट्रोकेमिकल हब विकसित कर रही है। इस परियोजना का प्रमुख हिस्सा चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा 20 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता वाला पीवीसी प्रोजेक्ट है। इसके पहले चरण में 10 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष क्षमता स्थापित की जा रही है, जिसे वित्त वर्ष 2027-28 तक पूरी तरह शुरू करने का लक्ष्य है। इससे पीवीसी आयात पर देश की निर्भरता कम होगी और भारत की आत्मनिर्भरता को और मजबूती मिलेगी।

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उपलब्धियों पर एक नजर

वीसीएम मैन्युफैक्चरिंग के लिए मर्करी बेस्ट कैटलिस्ट की जगह इको फ्रैंडली गोल्ड बेस्ट कैटलिस्ट प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल
सर्कुलरिटी और जीरो लिक्विड वेस्ट कॉन्सेप्ट पर सस्टेनेबल प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया है।
पोर्ट के पास होने और डिमांड क्लस्टर्स की मौजूदगी से लागत में बचत होती है, जिससे लॉजिस्टिक्स खर्च में कमी आती है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों तक आसान पहुंच।
रिन्युएबल एनर्जी का उपयोग, एनर्जी एफिशिएंट लाइटिंग और प्रभावी एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) सिस्टम का उपयोग।

स्थिर भविष्य के लिए

वीसीएम मैन्युफैक्चरिंग के लिए मर्करी बेस्ट कैटलिस्ट की जगह इको फ्रैंडली गोल्ड बेस्ट कैटलिस्ट प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल
सर्कुलरिटी और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज कॉन्सेप्ट पर सस्टेनेबल प्रोजेक्ट डिजाइन किया गया है।
सीमेंट निर्माण में लाइम स्लज के उपयोग से प्रति वर्ष लगभग 1144 हजार टन (केटीपीए) CO2 उत्सर्जन में कमी आएगी।
रिन्युएबल एनर्जी का उपयोग, एनर्जी एफिशिएंट लाइटिंग और प्रभावी एचवीएसी सिस्टम का उपयोग।
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