अदाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए

दूसरी तिमाही में एबिटडा सालाना आधार पर 46% बढ़कर ₹8,743 करोड़ रहा

अहमदाबाद, 23 अक्टूबर 2026: भारत के निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी थर्मल पावर जनरेटर कंपनी, अदाणी समूह की कंपनियों में शामिल अदाणी पावर लिमिटेड (एपीएल) ने आज वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित किए।

नतीजों पर टिप्पणी करते हुए, अदाणी पावर लिमिटेड के सीईओ एस. बी. ख्यालिया ने कहा, "अदाणी पावर लगातार अपनी उपलब्धियों को आगे बढ़ा रही है और मुनाफे के साथ-साथ परियोजनाओं को पूरा करने के क्षेत्र में भी नए मुकाम हासिल कर रही है। भारत की प्रमुख निजी थर्मल पावर प्रोड्यूसर कंपनी के रूप में हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की बढ़ती बुनियादी बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली और भरोसेमंद बिजली समय पर उपलब्ध हो। भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और जलवायु में होने वाले अप्रत्याशित बदलावों को देखते हुए, भारत की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने में घरेलू कोयले पर आधारित बिजली उत्पादन की अहमियत लगातार स्पष्ट होती जा रही है। हमें गर्व है कि वर्ष 2032 तक 100 गीगावाट की नई थर्मल पावर क्षमता जोड़ने के देश के लक्ष्य को पूरा करने में हम अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अपनी अनुभवी टीमों और सक्षम साझेदारों के दृढ़ सहयोग से हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि भारत को अपनी विकास संबंधी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए चौबीसों घंटे आवश्यक बिजली उपलब्ध होती रहे।"

पावर मार्किट अपडेट:

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत में बिजली की मांग पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 11.5% बढ़कर 502 बिलियन यूनिट हो गई। इस वृद्धि के पीछे तेज आर्थिक विकास और कमजोर मानसून प्रमुख कारण रहे। बिजली की बढ़ती मांग के चलते देश में बिजली उत्पादन भी सालाना आधार पर 11% बढ़कर 536 बिलियन यूनिट पहुंच गया। वहीं, हाइड्रोपावर उत्पादन की सीमित संभावनाओं के कारण बिजली आपूर्ति में कोयले और लिग्नाइट से बनने वाली बिजली की हिस्सेदारी बढ़कर 66% हो गई, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 65% थी। इस तिमाही में बिजली उत्पादन में हुई कुल अतिरिक्त वृद्धि में 73% योगदान कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन का रहा। भारत के कोयला आधारित पावर प्लांट्स का औसत प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ), यानी उपलब्ध उत्पादन क्षमता के उपयोग का स्तर, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बढ़कर 68% हो गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 62% था।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में देश में बिजली की अधिकतम मांग बढ़कर 270 गीगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 230 गीगावाट की तुलना में 18% अधिक है। इस दौरान उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सबसे अधिक 27-27 गीगावाट की अधिकतम बिजली मांग दर्ज की गई। इनके बाद गुजरात में 23 गीगावाट, तमिलनाडु में 20 गीगावाट और कर्नाटक में 16 गीगावाट की अधिकतम बिजली मांग रही।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में इंडियन एनर्जी एक्सचेंज पर अगले दिन बिजली आपूर्ति के लिए निर्धारित बाजार मूल्य पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 46% बढ़कर ₹5.7 प्रति यूनिट हो गया। वहीं, रियल-टाइम मार्केट में बिजली का बाजार मूल्य भी सालाना आधार पर 49% बढ़कर ₹5.2 प्रति यूनिट दर्ज किया गया।


परिचालन प्रदर्शन:

प्रमुख मानदंड क्यू2
एफवाय27
क्यू2 एफवाय26 एच1 FY27 एच1 एफवाय26 एफवाय26
परिचालन क्षमता (मेगावाट)(1) 18,150 18,150 18,150 18,150 18,150
प्लांट लोड फैक्टर (पीएलएफ) 70.1% 62.8% 74.1% 64.8% 66.5%
बिजली की बिक्री (बिलियन यूनिट) 26.4 23.7 55.1 48.3 99.1

(1) परिचालन क्षमता के आंकड़ों में 180 मेगावाट का चुरक ताप विद्युत संयंत्र शामिल नहीं है। अधिग्रहण के बाद इस संयंत्र को दोबारा चालू करने की प्रक्रिया चल रही है।

  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पीपीए के तहत, साथ ही खुले बाजार और अल्पकालिक अनुबंधों के माध्यम से बिजली की बढ़ती मांग के चलते, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही की तुलना में बिजली बिक्री की मात्रा में वृद्धि हुई।
  • पीपीए के तहत बिजली की बिक्री 29.7% बढ़कर 23.4 बिलियन यूनिट (बीयू) हो गई। वहीं, प्रति यूनिट बिजली की प्राप्त औसत दर में 12.7% की वृद्धि हुई और यह ₹6.4 प्रति किलोवाट-घंटा पर पहुंच गई।
  • मजबूत मांग के कारण खुले बाजार और अल्पकालिक अनुबंधों के तहत बेची जाने वाली बिजली की प्रति यूनिट प्राप्त दर 33.1% बढ़कर ₹7.2 प्रति किलोवाट-घंटा हो गई। हालांकि, इस माध्यम से बिजली आपूर्ति की मात्रा में 43% की गिरावट आई। इसकी प्रमुख वजह यह रही कि पहले उपलब्ध अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता का एक हिस्सा मध्यम अवधि के बिजली आपूर्ति अनुबंधों के तहत आवंटित कर दिया गया।

बिज़नेस अपडेट:

  • एपीएल द्वारा जीवीके एनर्जी लिमिटेड (जीवीकेईएल) के लिए प्रस्तुत समाधान योजना को सफल घोषित किया गया है। जीवीके एनर्जी दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के तहत कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया से गुजर रही है। कंपनी उत्तराखंड में 330 मेगावाट की अलकनंदा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट का स्वामित्व और संचालन करती है। इसके अधिग्रहण से अदाणी पावर हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जनरेशन सेक्टर में प्रवेश कर सकेगी।
  • अदाणी पावर को उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से 1,320 मेगावाट की सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर क्षमता से बिजली आपूर्ति के लिए एलओए प्राप्त हुआ है। इसमें शुद्ध आपूर्ति क्षमता 1,234 मेगावाट होगी। इसके लिए 25 वर्ष का पावर सप्लाई एग्रीमेंट किया जाएगा। इस समझौते के साथ अदाणी पावर की आगामी 23.72 गीगावाट थर्मल पावर क्षमता में से 62% क्षमता के लिए बिजली आपूर्ति संबंधी करार हो जाएंगे।
  • अदाणी पावर और भूटान सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी ड्रुक ग्रीन पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीजीपीसी) ने भूटान की राजधानी थिम्पू में 770 मेगावाट की चमकारछू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट स्थापित करने के लिए शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। इस परियोजना के लिए दोनों कंपनियां एक संयुक्त इकाई बनाएंगी, जिसमें अदाणी पावर की 49% और डीजीपीसी की 51% हिस्सेदारी होगी। भूटान में दोनों साझेदारों की यह दूसरी हाइड्रोपावर परियोजना है। इससे पहले वे 570 मेगावाट की वांगछू हाइड्रोपावर परियोजना पर साथ काम कर रहे हैं।
  • सीएआरई केयर रेटिंग्स और इंडिया रेटिंग्स ने अदाणी पावर की क्रेडिट रेटिंग को 'एए; स्टेबल' से बढ़ाकर 'एए+; स्टेबल' कर दिया है। यह सुधार कंपनी के लगातार मजबूत वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन, विविध कारोबार वाले पोर्टफोलियो के साथ बाजार में उसकी अग्रणी स्थिति और भविष्य में राजस्व की बेहतर संभावनाओं को दर्शाता है। रेटिंग में कंपनी की मजबूत वित्तीय लचीलेपन और पर्याप्त नकदी उपलब्धता को भी ध्यान में रखा गया है, जिससे क्षमता विस्तार योजनाओं के लिए की जाने वाली पूंजीगत प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
  • अदाणी पावर और उसकी 10 पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियों के विलय की योजना, जिसे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की अहमदाबाद और मुंबई पीठों ने मंजूरी दी थी, संबंधित शर्तें पूरी होने के बाद 25 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गई है। इसके तहत कोरबा पावर लिमिटेड और विदर्भ इंडस्ट्रीज पावर लिमिटेड सहित सभी 10 सहायक कंपनियों का अदाणी पावर लिमिटेड में विलय कर दिया गया है।

वित्तीय प्रदर्शन:

विवरण
(करोड़ रुपए में)
वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही Change बदलाव (+/-) वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही बदलाव (+/-) वित्त वर्ष 26
जारी परिचालन से राजस्व(1) 17,014.06 13,106.34 29.8% 34,564.49 26,809.28 28.9% 53,781.45
जारी अन्य आय(2) 514.29 532.92 (3.5%) 899.81 997.47 (9.8%) 1,801.18
कुल जारी राजस्व 17,528.35 13,639.26 28.5% 35,464.30 27,806.75 27.5% 55,582.63
कुल रिपोर्टेड राजस्व 19,950.60 14,307.79 39.4% 39,272.90 28,881.49 36.0% 57,865.28
जारी एबिट्डा 6,320.97 5,332.71 18.5% 13,303.71 11,076.33 20.1% 21,285.35
रिपोर्टेड एबिट्डा 8,743.22 6,001.24 45.7% 17,112.31 12,151.07 40.8% 23,430.87
जारी कर पूर्व मुनाफा(3) 4,369.51 3,297.68 32.5% 9,283.66 7,095.77 30.8% 13,353.99
रिपोर्टेड कर पूर्व मुनाफा 6,791.76 3,966.20 71.2% 13,092.25 8,170.51 60.2% 15,499.51
सहयोगी कंपनी से मुनाफे में हिस्सेदारी(4) (3.04) - 114.65 - -
कर खर्च / (क्रेडिट) (230.60) 1,059.74 (121.8%) 1,320.98 1,958.92 (32.6%) 2,528.43
कर के बाद मुनाफा 7,019.32 2,906.46 141.5% 11,885.92 6,211.59 91.4% 12,971.08

(1), (2), (3): निरंतर परिचालन राजस्व और निरंतर अन्य आय में पिछली अवधि की आय की पहचान शामिल नहीं है। निरंतर ईबीआईटीडीए और निरंतर कर-पूर्व लाभ में पिछली अवधि की आय और व्यय शामिल नहीं हैं। | (4): वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही और छमाही के परिणामों में जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड में हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद सहयोगी कंपनी से प्राप्त लाभ का हिस्सा शामिल है।
ईबीआईटीडीए: ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पूर्व आय | nm: अर्थहीन

प्रमुख वित्तीय उपलब्धियां:

  • जारी परिचालन से प्राप्त राजस्व: वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अदाणी पावर का जारी परिचालन से प्राप्त राजस्व 29.8% बढ़कर ₹17,014.06 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह ₹13,106.34 करोड़ था।
  • राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारण बिजली की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के चलते बिक्री की मात्रा में वृद्धि, आयातित कोयले की कीमतों में तेज उछाल के कारण पीपीए के तहत प्राप्त बेहतर दरें और खुले बाजार में बिजली की बिक्री से प्रति यूनिट अधिक आय होना रहे।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में जारी परिचालन से प्राप्त राजस्व 28.9% बढ़कर ₹34,564.49 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹26,809.28 करोड़ था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में ईंधन की लागत 41.8% बढ़कर ₹10,229.38 करोड़ हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह ₹7,216.23 करोड़ थी। लागत में इस वृद्धि की प्रमुख वजह बिजली उत्पादन और बिक्री की अधिक मात्रा तथा आयातित कोयले की संयंत्र तक पहुंचने की लागत में 50% की बढ़ोतरी रही।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ईंधन की लागत 36% बढ़कर ₹19,768.50 करोड़ हो गई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹14,535.04 करोड़ थी।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में जारी परिचालन से एबिटडा बढ़कर ₹6,320.97 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के ₹5,332.71 करोड़ के मुकाबले 18.5% अधिक है। इस वृद्धि में बिजली बिक्री की मात्रा बढ़ने, बेहतर टैरिफ और खुले बाजार में बिजली बिक्री से अधिक आय मिलने का योगदान रहा। ईंधन लागत में वृद्धि के बावजूद कंपनी ने परिचालन खर्चों को नियंत्रित रखा।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जारी परिचालन से एबिटडा 20.1% बढ़कर ₹13,303.71 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹11,076.33 करोड़ था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पिछली अवधि से संबंधित ₹2,422.25 करोड़ के राजस्व को एकमुश्त दर्ज किया गया। इसका प्रमुख कारण कुछ बिजली खरीद समझौतों के तहत पूर्व अवधि के ऊर्जा शुल्क में संशोधन रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इस मद के तहत ₹668.53 करोड़ का राजस्व दर्ज किया गया था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में पिछली अवधि से संबंधित ₹3,808.60 करोड़ के राजस्व को दर्ज किया गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह राशि ₹1,074.74 करोड़ थी।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वित्तीय लागत 9.7% घटकर ₹760.23 करोड़ रह गई, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹841.63 करोड़ थी। इस कमी की प्रमुख वजह परिचालन से मजबूत नकदी प्रवाह और परिचालन संबंधी ऋण का नियंत्रित उपयोग रहा।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में वित्तीय लागत 2.2% घटकर ₹1,661.60 करोड़ रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹1,698.56 करोड़ थी।
  • एकमुश्त मदों को छोड़कर, वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में जारी परिचालन से कर-पूर्व लाभ 32.5% बढ़कर ₹4,369.51 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह ₹3,297.68 करोड़ था। इस वृद्धि की प्रमुख वजह परिचालन से मजबूत कमाई और वित्तीय लागत पर प्रभावी नियंत्रण रहा।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में जारी परिचालन से कर-पूर्व लाभ 30.8% बढ़कर ₹9,283.65 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह ₹7,095.77 करोड़ था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में दर्ज कर-पूर्व लाभ 71.2% बढ़कर ₹6,791.76 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी तिमाही में यह ₹3,966.20 करोड़ था। इस वृद्धि का मुख्य कारण जारी परिचालन से मजबूत लाभ के साथ-साथ तिमाही के दौरान पिछली अवधि से संबंधित अधिक आय को एकमुश्त मद के रूप में दर्ज किया जाना रहा।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दर्ज कर-पूर्व लाभ 60.2% बढ़कर ₹13,092.25 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹8,170.51 करोड़ था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में कर-पश्चात लाभ में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई। यह 141.5% बढ़कर ₹7,019.32 करोड़ हो गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह ₹2,906.46 करोड़ था।
  • वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कर-पश्चात लाभ 91.4% बढ़कर ₹11,885.92 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की इसी अवधि में यह ₹6,211.59 करोड़ था।
  • 30 सितंबर 2026 तक कंपनी का कुल बकाया ऋण ₹61,860.37 करोड़ रहा, जबकि 31 मार्च 2026 तक यह ₹53,555.54 करोड़ था। वहीं, 30 सितंबर 2026 तक कंपनी का शुद्ध बकाया ऋण ₹45,845.92 करोड़ रहा, जबकि 31 मार्च 2026 तक यह ₹45,022.02 करोड़ था।

प्रोजेक्ट अपडेट:

एपीएल अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना के तहत 23,720 मेगावाट की नई थर्मल पावर क्षमता जोड़ने के लिए तेजी से काम कर रही है। कंपनी की 1,320 मेगावाट की कोरबा फेज-II सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना और 1,600 मेगावाट की महान फेज-II अल्ट्रा-सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना (यूएससीटीपीपी) का निर्माण कार्य पूरा होने के उन्नत चरण में है।

कोरबा फेज-II की पहली 660 मेगावाट क्षमता वाली सुपरक्रिटिकल यूनिट को पावर ग्रिड से जोड़ दिया गया है और इसके जल्द ही चालू होने की उम्मीद है। दूसरी इकाई के वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही में चालू होने की संभावना है। वहीं, महान फेज-II परियोजना के वित्त वर्ष 2027-28 की शुरुआती अवधि में पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। इसी तरह, 1,600 मेगावाट की रायपुर फेज-II यूएससीटीपीपी और 1,600 मेगावाट की रायगढ़ फेज-II यूएससीटीपीपी ने निर्माण कार्य शुरू होने के 30 महीने से भी कम समय में 65% से अधिक प्रगति हासिल कर ली है। इन दोनों परियोजनाओं के वित्त वर्ष 2028-29 में चालू होने की योजना है।

इन परियोजनाओं के अलावा, 1,600 मेगावाट की मिर्जापुर ग्रीनफील्ड यूएससीटीपीपी, 1,600 मेगावाट की महान फेज-III यूएससीटीपीपी और 2,400 मेगावाट की अनूपपुर ग्रीनफील्ड यूएससीटीपीपी का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इन सभी परियोजनाओं में अब तक संतोषजनक प्रगति हुई है।

एपीएल रायपुर स्थित अपने बिजली उत्पादन केंद्र की क्षमता बढ़ाकर 4,570 मेगावाट करेगी। इसके लिए कंपनी 1,600 मेगावाट क्षमता वाली फेज-III यूएससीटीपीपी स्थापित करेगी। इस परियोजना से उत्पादित बिजली की आपूर्ति के लिए कंपनी ने जुलाई 2026 में महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के साथ 1,600 मेगावाट का पीएसए किया है।

यह समझौता, वित्त वर्ष 2024-25 में एपीएल और एमएसईडीसीएल के बीच हुए 1,600 मेगावाट के पहले बिजली आपूर्ति समझौते के अतिरिक्त है। पहले समझौते के तहत बिजली की आपूर्ति आगामी रायपुर फेज-II यूएससीटीपीपी से की जाएगी।

ईएसजी प्रदर्शन:

  • एपीएल के अंतर्देशीय थर्मल पावर प्लांट्स में प्रति मेगावाट-घंटा बिजली उत्पादन पर विशिष्ट जल खपत 2.28 घन मीटर दर्ज की गई है। यह 3.50 घन मीटर की निर्धारित वैधानिक सीमा से 35% कम है। वहीं, कंपनी के सभी थर्मल पावर प्लांट्स में औसत विशिष्ट जल खपत 2.18 घन मीटर प्रति मेगावाट-घंटा रही।
  • एनएसई सस्टेनेबिलिटी द्वारा किए गए वार्षिक आकलन में एपीएल को 66 ईएसजी अंक मिले हैं, जिससे कंपनी को ‘एस्पायरिंग’ श्रेणी में रखा गया है। यह ईएसजी यानी पर्यावरण, सामाजिक उत्तरदायित्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस के सिद्धांतों के प्रति कंपनी की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, थर्मल पावर उत्पादन क्षेत्र में कंपनी की प्रमुख भूमिका को भी रेखांकित करता है।
  • एसएंडपी ग्लोबलने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए एपीएल का कॉरपोरेट सस्टेनेबिलिटी असेसमेंट (सीएसए) स्कोर संशोधित कर 100 में से 71 कर दिया है। यह स्कोर यूटिलिटी क्षेत्र के 41 अंकों के औसत से काफी अधिक है।

अदाणी पावर के बारे में जानकारी

अदाणी समूह का हिस्सा अडानी पावर लिमिटेड (एपीएल), भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की थर्मल पावर प्रोड्यूसर है। कंपनी की कुल परिचालन थर्मल पावर क्षमता 18,110 मेगावाट है, जो गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में स्थित 12 पावर प्लांट्स में फैली हुई है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में 180 मेगावाट क्षमता वाले एक थर्मल पावर प्लांट को फिर से चालू करने की प्रक्रिया चल रही है। गुजरात में कंपनी का 40 मेगावाट क्षमता वाला सौर ऊर्जा संयंत्र भी है। बिजली क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञों की विश्वस्तरीय टीम के सहयोग से अदाणी पावर अपनी विकास क्षमता को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का उपयोग करके भारत को बिजली की अतिरिक्त उपलब्धता वाला देश बनाने तथा सभी को गुणवत्तापूर्ण और किफायती बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है।

अधिक जानकारी के लिए लॉगिन: www.adanipower.com

मीडिया संपर्क: Roy.paul@adani.com

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