डीओजे मामले से विकसित भारत के संकल्प तक: गौतम अदाणी के लिए भरोसा बना राष्ट्र निर्माण की ताकत

अहमदाबाद, 13 अगस्त, 2026: भारत अपने 80वें स्वतंत्रता दिवस की तैयारी कर रहा है। इसी बीच, अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी ने अपनी बात, अपनों के साथ के दूसरे संवाद में उन मूल्यों पर बात की, जो लंबे समय तक कायम रहने वाली संस्थाओं की नींव बनते हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि मुश्किल समय हमें क्या सिखाता है और भारत के भविष्य को आकार देने में हर पीढ़ी की क्या जिम्मेदारी है।

10 अगस्त, 2026 को यू.एस. डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ न्यूयॉर्क (ईडीएनवाई) द्वारा उनके खिलाफ यू.एस. डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (डीओजे) का आपराधिक मामला खारिज किए जाने के कुछ ही दिनों बाद दिए गए इस संबोधन में कानूनी फैसले से आगे उन सिद्धांतों पर बात की गई, जिन्होंने समूह के इतिहास के एक अहम् दौर में उसका मार्गदर्शन किया। हिंडनबर्ग रिसर्च के आरोपों और उसके बाद आए डीओजे मामले को याद करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि इस पूरे अनुभव ने कानून के राज में उनका भरोसा और मजबूत किया और उन्हें कई अहम् सीख दीं। उन्होंने कहा कि इस दौर ने उस विश्वास को भी और पक्का किया है, जो दशकों से समूह का मार्गदर्शन करता आया है। लंबे समय तक कायम रहने वाला भरोसा अपने वादे निभाने, अपने मूल्यों पर कायम रहने और खासकर मुश्किल समय में सही काम करने से बनता है।

तीन लाख से ज्यादा कर्मचारियों और साझेदारों वाले, 700 से अधिक स्थानों तक फैले अदाणी परिवार को संबोधित करते हुए गौतम अदाणी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस सिर्फ भारत की उपलब्धियों का जश्न मनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह सोचने का भी अवसर है कि आज की पीढ़ी अपने पीछे कैसी विरासत छोड़कर जाएगी। देश जब विकसित भारत की ओर आगे बढ़ रहा है, ऐसे में उन्होंने हर कर्मचारी और साझेदार से एक सरल लेकिन गहरे सवाल पर विचार करने को कहा, आने वाली पीढ़ियां हमारी पीढ़ी को किस बात के लिए याद करेंगी?

यह संबोधन अपनी बात, अपनों के साथ की उस बातचीत को आगे बढ़ाता है, जिसकी शुरुआत अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर हुए इसके पहले संवाद से हुई थी। उस दौरान गौतम अदाणी ने श्रम की गरिमा और हर संस्था में लोगों की अहम् भूमिका पर बात की थी। इस बार उन्होंने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए, उन सिद्धांतों पर चर्चा की, जो नेतृत्व को दिशा देते हैं, संस्थाओं को मजबूत बनाते हैं और पीढ़ियों तक अपनी जगह बनाए रखते हैं।

उन्होंने कहा कि इन सिद्धांतों की नींव सबसे पहले घर में पड़ी। ईमानदारी, विनम्रता और अपने वादे को निभाना उनके जीवन के हर बड़े फैसले का आधार बना। उनके पिता की यह सीख कि दिया हुआ वादा हर हाल में निभाना चाहिए और उनकी माँ का त्याग व संवेदनशीलता का शांत उदाहरण आज भी उनका मार्ग प्रशस्त करता है।

किशोर उम्र में अवसर की तलाश में घर छोड़ना उनके लिए ऐसा अनुभव था, जिसने उन्हें वह सिखाया जो कोई कक्षा नहीं सिखा सकती। उन्होंने कहा कि इंसान का चरित्र बिना तराशे हीरे की तरह होता है, जिसकी चमक धैर्य, अनुभव और मुश्किलों से गुजरने के बाद ही सामने आती है। उन्होंने कहा कि कई मायनों में उनकी अपनी कहानी अदाणी परिवार के उन अनगिनत लोगों की कहानी जैसी है, जिन्होंने अवसर की तलाश में घर की पहचान और सहजता को पीछे छोड़ा, देश के निर्माण में योगदान देने का रास्ता चुना और अपने परिवारों के लिए बेहतर भविष्य बनाने की कोशिश की।

मुश्किल वक्त में चरित्र की असली पहचान

समुद्र मंथन की कहानी का जिक्र करते हुए, श्री अदाणी ने कहा कि मुश्किलें इंसान का चरित्र नहीं बनातीं, बल्कि उसे सामने लाती हैं। हिंडनबर्ग के आरोप और उसके बाद की डीओजे कार्यवाही भी ऐसा ही एक दौर था। इन घटनाओं से समूह के सिद्धांत नहीं बदले, बल्कि धैर्य रखने, सही प्रक्रिया पर भरोसा करने और लोगों की कड़ी नजर के बीच भी अपने मूल्यों पर कायम रहने का महत्व और साफ हुआ। उन्होंने समूह के 20,000 करोड़ रुपए के फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ) को वापस लेने के फैसले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कानूनी तौर पर आगे बढ़ने का अधिकार होने के बावजूद समूह ने यह फैसला लिया, क्योंकि यही उसके विश्वास का सबसे स्पष्ट उदाहरण था। उन्होंने कहा, “भरोसा किसी भी कानूनी अधिकार से बड़ा है।” उन्होंने आगे कहा कि कानून हमें अधिकार देता है, लेकिन उन अधिकारों का इस्तेमाल कब करना है, यह हमारे मूल्य तय करते हैं।

अदाणी ग्रुप के लिए सफलता का मतलब सिर्फ बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से नहीं है। इसे कर्मचारियों, निवेशकों, ऋणदाताओं, साझेदारों और समुदायों के बीच कमाए गए भरोसे से भी मापा जाता है। श्री अदाणी ने कहा कि यह भरोसा किसी एक दिन में नहीं बनता। यह हर दिन अपने वादे निभाने और लगातार अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने से धीरे-धीरे बनता है।

विश्वास को काम में उतारना

अमेरिका में चल रही कानूनी कार्यवाही के दौरान भी श्री अदाणी ने कहा कि समूह का पूरा ध्यान अपने काम को आगे बढ़ाने पर रहा। समूह ने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया और अपने वादों को पूरा करना जारी रखा। अपने इतिहास के सबसे ज्यादा निगरानी वाले दौर में भी समूह ने अपने कारोबार का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन किया, महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया और अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी स्थिति को और मजबूत किया।

इस दौर ने अदाणी परिवार की असली ताकत को भी सामने ला दिया। जब लोगों का ध्यान कानूनी कार्यवाही पर था, तब कर्मचारी, श्रमिक, सप्लायर, ठेकेदार, वेंडर और साझेदार चुपचाप अपना काम करते रहे। उन्होंने कारोबार को आगे बढ़ाया, ग्राहकों की सेवा की और अपने वादों को पूरा किया। उनकी लगातार मेहनत और समर्पण ने समूह के सबसे मुश्किल दौरों में से एक को विकास के सबसे मजबूत दौरों में बदलने में बड़ी भूमिका निभाई।

श्री अदाणी ने कहा कि इस अनुभव ने मानवता में उनका भरोसा भी और मजबूत किया। देशभर में ऐसे कई लोग, जिनसे वे कभी मिले तक नहीं थे, उन्होंने आगे बढ़कर हौंसला दिया, प्रार्थनाएँ कीं और अपने तरीके से समर्थन जताया। उन्होंने उन लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने समूह पर सवाल उठाए और उसकी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आलोचना, चाहे उसके पीछे कोई भी मंशा हो, खुद को देखने, अपनी कमियों को समझने और बेहतर करने का अवसर देती है।

गौतम अदाणी ने ग्रुप की उपलब्धियों के पीछे खड़े लोगों को सम्मान देते हुए कहा कि हर उपलब्धि की असली अहमियत उन लोगों से जुड़ी होती है, जिनकी मेहनत से वह संभव हो पाती है। खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क में काम करने वाले युवा इंजीनियर अमित कुमार के साथ हुई बातचीत को याद करते हुए, श्री अदाणी ने कहा कि इससे उनका यह विश्वास और मजबूत हुआ कि विकास का मतलब सिर्फ विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नहीं है, बल्कि उससे लोगों में पैदा होने वाली उम्मीद, लौटने वाला सम्मान और बदलती जिंदगियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के महत्व पर लौटते हुए, श्री अदाणी ने कहा कि यह अवसर देश की उपलब्धियों का जश्न मनाने के साथ-साथ उस जिम्मेदारी को याद करने का भी है, जो हर पीढ़ी अपने साथ लेकर चलती है।

आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ते भारत की बात करते हुए, उन्होंने कहा कि इतिहास सिर्फ इस बात को याद नहीं रखेगा कि भारत ने कितना इंफ्रास्ट्रक्चर बनाया, बल्कि यह भी याद रखेगा कि देश ने कितने अवसर पैदा किए, कितने समुदायों को मजबूत बनाया और लोगों के भीतर कितनी उम्मीद जगाई।

उन्होंने अदाणी परिवार के हर सदस्य और अपने साझेदारों से बीते दो वर्षों से मिली सीख को विनम्रता, ईमानदारी और नई सोच के साथ आगे ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आगे का काम सिर्फ विश्वस्तरीय कारोबार खड़ा करना नहीं है, बल्कि ऐसी संस्थाएं बनाना है, जो किसी एक व्यक्ति से आगे तक कायम रहें, लोगों के लिए नए अवसर पैदा करें और एक मजबूत व आत्मनिर्भर भारत बनाने में योगदान दें। मूल्यों से जुड़ी और देश की सेवा के लिए समर्पित ऐसी संस्थाएँ ही विकसित भारत के साझा सपने को साकार करने में मदद करेंगी।

अदाणी समूह के बारे में जानकारी

अहमदाबाद मुख्यालय वाला अदाणी ग्रुप भारत के सबसे बड़े और तेजी से बढ़ते विविध कारोबार वाले समूहों में से एक है। एनर्जी और यूटिलिटीज, ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स, जिसमें पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, मरीन सर्विसेस और रेलवे शामिल हैं, मेटल्स और मटेरियल्स तथा कंज्यूमर सेक्टर में समूह की मजबूत उपस्थिति है। अदाणी समूह ने इन क्षेत्रों में मार्केट में अपनी मजबूत स्थिति बनाई है। समूह की सफलता ‘नेशन बिल्डिंग’ और ‘ग्रोथ विद गुडनेस’ की मूल सोच से प्रेरित है, जिसमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर ध्यान दिया जाता है। अदाणी समूह अपने सीएसआर प्रोग्राम्स के जरिए एनवायरनमेंटल स्टूवर्डशिप और कम्युनिटी डेवलपमेंट के लिए भी काम करता है। ये प्रोग्राम्स सस्टेनेबिलिटी, डायवर्सिटी और शेयर्ड वैल्यूज के सिद्धांतों पर आधारित हैं।

मीडिया संपर्क: Roy.Paul@adani.com

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