डॉ. प्रीति अदाणी

चेयरपर्सन, अदाणी फाउंडेशन

डॉ. प्रीति अदाणी, अदाणी फाउंडेशन की फाउंडर चेयरपर्सन हैं। अदाणी फाउंडेशन एशिया की प्रमुख नॉन-प्रॉफिट संस्था है। अदाणी फाउंडेशन समाज कल्याण के लिए कुल 7 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध है और हर साल करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर सामाजिक कार्यों पर खर्च करती है। यह अदाणी ग्रुप की कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यूनिट है। अदाणी भारत का तेजी से बढ़ता हुआ कारोबारी ग्रुप है। इसमें अलग-अलग क्षेत्रों की कई बड़ी और अग्रणी कंपनियां शामिल हैं। अदाणी ग्रुप का हेडक्वार्टर अहमदाबाद में है।


डॉ. प्रीति अदाणी पेशे से डॉक्टर और एक समर्पित शिक्षाविद और समाजसेवी हैं। साल 1996 में उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र को करियर बनाने के बजाय समाज सेवा का रास्ता अपनाया। इसकी शुरुआत कच्छ के मुंद्रा क्षेत्र के कुछ गांवों में एक छोटे से प्रयास के रूप में हुई थी। जो आज एक सशक्त राष्ट्रीय समाजसेवी आंदोलन में बदल चुका है। वर्तमान में अदाणी फाउंडेशन भारत के 22 राज्यों के 7,247 गांवों और शहरी वार्डों में कार्य कर रही है। डॉ. अदाणी के नेतृत्व में, 800 से अधिक समर्पित विकास पेशेवरों की टीम समाजिक काम में जुटी रहती है। अदाणी फाउंडेशन पांच प्रमुख क्षेत्रों में प्रभावी कार्य कर रहा है-शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, जलवायु, सामुदायिक विकास और सतत आजीविक विकास। इन सभी पहलों के माध्यम से अब तक 1.33 करोड़ से अधिक लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया गया है।


डॉ. प्रीति अदाणी शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को लगातार आगे बढ़ा रही हैं। वे अदाणी यूनिवर्सिटी और अदाणी इंस्टीट्यूट ऑफ डिजिटल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट की अध्यक्ष हैं। वह इन संस्थानों को उत्कृष्टता की दिशा में आगे ले जाने के लिए रणनीतिक नेतृत्व प्रदान करती हैं। अप्रैल 2026 में उन्हें दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च का चांसलर नियुक्त किया गया। यह एक डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी है।


डॉ. अदाणी कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी जुड़ी हुई हैं, जहां वह सलाहकार और बोर्ड सदस्य के रूप में रेगुलेशन, पॉलिसी और इंस्टीट्यूशनल डेवलपमेंट से जुड़े विषयों पर महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।


शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें साल 2020 में गुजरात लॉ सोसाइटी यूनिवर्सिटी द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। इसके अलावा, साल 2025 में महाराष्ट्र स्थित दत्ता मेघे इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च द्वारा उन्हें “ऑनोरिस कॉज़ा” की उपाधि से सम्मानित किया गया।

Scroll to top